हिपेटाइटिस 'ए' से कोमा का केस
पिछले महीने उन्नतीस साल की एक महिला अर्ध बेहोशी की हालत में दूसरे शहरसे शिफ्ट हो कर मेरी देखभालमे आई सी यु में दाखिल हुई थी। उन्हें हिपेटाइटिस ‘ए’ नामक पीलिया हुआ था। लेकिन उनका पीलिया अब जानलेवा स्थितिमे था। शुरूमे उन्हें खाने से अरुचि एवं शक्ति का आभाव लगरहा था। आगे चलकर उन्हें उबक आना और उल्टियां होना शुरू हो गया। उनकी आँखे एवं पिशाबका रंग पीला होने लगा। अस्पतालमे दाखिल होते वख्त साँस लेने में धिक्कत भी हो रही थी।
हमारे मरीज़ का ऑक्सीजन स्तर भी काम हो रहा था। तुरंत ऑक्सजन दिया गया और बेहोशी दुर करनेकी दवाई शुर की गई। दुसरे दिन सुबह उनकी स्थितिमे सुधार था और वह सामान्य सूचनाओं का पालन कर रही थी लेकिन शाम होते होते हालात फिरसे बिगड़ने लगे। उनकी बेहोशी फिर से बढ़ गई। दो दिन की सघन सारवार के बाद तबियत फिरसे ठीक हुई और उन्होंने संपूर्ण सभान अवस्था पुनः प्राप्त की। उस पश्च्यात उनकी सेहत स्थिर रही और उन्हें रूममें शिफ्ट किया गया बादमे उन्हें अस्पतालसे छुट्टी दी गई।
हिपेटाइटिस ‘ए’ कैसे होता है?
हिपेटाइटिस ‘ए’ नमक पीलिया वाइरस से दूषित चीज़ खानेसे या दूषित प्रवाही पीनेसे होता है। एक बार जठरमे पहुँचने के बाद यह वाइरस अंतड़िओंकी दीवार से हो कर खून के साथ लिवरमे पहुँच जाते है। लिवरमे यह वाइरस लिवर के कोष की सिस्टमका उपयोग करके एक में से अनेक में रूपांतरित जाते है। वाइरस के शरीरमे प्रवेश के बाद लगभग दो हफ्ते के बाद पीलिये के लक्षण दिखाई देते है। किन्तु जान लेवा पीलिया सिर्फ ०.०१५% से ०.५ % लोगो मे ही होता है।
यह छुट्टियों का समय है और मुमकिन हे की आप किसी पर्यटन पर हो। बाहर का खाना-पीना स्वाभाविक है। इस समय पानीमे पनपते शुक्ष्म जीवो से संक्रमण होने का खतरा बना रहता है और आपको भी ऐसे रोग होने की संभावनाए बढ़ जाती है।
हिपेटाइटिस में क्या होता है ?
सामान्य भाषामे हिपेटाइटिस यानि लिवर की सूजन। लिवर के कोष बीमार हो जाते है और खूनमे बनते ज़हरीले तत्वोंको ख़त्म नहीं कर शकते। एक ज़हरीला तत्त्व जो दिमाग को सुन्न करके बेहोश बना देता है वह है ऐमोनिया। हमारी बड़ी अंतड़ी मे रहे शुक्ष्म जीवाणु जो प्रोटीन हम हज़म नहीं कर पाते उसे हज़म करते है। इस प्रक्रिया से एमोनिया पैदा होता है। हमारा लिवर तुरंत उसे बिनहानिकारक तत्त्व में बदल कर उसका निकल करता है। जब बीमार लिवर एमोनिया को हटा नहीं पाता, तब एमोनिया की मात्रा खून में बढ़ने लगती है। ऐमोनिया से दिमागके एस्ट्रोसैट (ASTROCYTE) नामक कोषोमे सूजन आती हे और दिमाग के महत्वपूर्ण भागमे रहे कोष ऊपर दबाव पड़ने से उनका कार्य स्थगित होना शुरू हो जाता हैऔर दिमाग सुन्न हो जाता है। रोग की तीव्रता जैसे जैसे बढ़ती है बेहोशी और भी गहरी होती जाती है और मरीज़ कोमामे चला जाता है। यह एक गंभीर परिस्थिति है और तुरंत इलाज न होने पर मृत्यु हो जाती है।
हिपेटाइटिस एवं खानपान से फैलती अन्य बीमारिओसे कैसे बचे ?
- कोई भी चीज खाने या पिने से पहले अथवा खाना पकाने से पहले हाथ साबुन से अच्छी तरह साफ़ करले।
- किसीभी परवश इन्सानका डाइपर (आंतर वस्त्र) बदलते वख्त और उनके मल-मूत्र का निकल करते वख्त पूरी सावधानी बरते। ध्यानमे रहे की हिपेटाइटिस ‘ए’ का वाइरस मरीज़ में पीलिए के लक्षण दिखाई देने से पहलेही मरीज़ के मलमे निकलना शुरू हो जाते है। गलतीसे भी ऐसे दूषित हाथो से आपने खा लिया या किसी दूसरे को परोसा तो दोनों को संक्रमण होने का खरता बढ़ जायेगा।
पर्यटन के वख्त सावधानी बरते
- ताज़े फल एवं सब्जिकी परत जहां तक मुमकिन है आप खूद निकले।
- अच्छी तरह पका हुआ खाना खाये। आधा पका हुए खाने के व्यंजनसे दूर रहे।
- ठीक तरह से साफ नहीं दिखती हो ऐसी जगह से खाना मत लीजिये।
- शुद्ध पानी का ही आग्रह रखे। (बोटल्ड वॉटर अथवा आर ओ / फिलटर्ड पानी)
- फलो का रस अथवा शरबत किसी भी अनजान जगह से न पिए। खास करके बर्फ डाला हुआ रस न पीए।