क्या आप मौत खरीद रहे हो ?

हमारी रोज़मर्राह की गतिशील जीवनशैली में किसी न किसी कारणवश हम ज़्यादा और ज़्यादा बाज़ारसे मंगाये हुए भोजन पर निर्भर होते जा रहे है। घर पर खाना पका ने की बजाय ऑर्डर कर के खाना मंगवाने का ट्रेंड बढ़ता जाता है। सुगन्धित मसाले डाले हुए अति स्वादिष्ट स्ट्रीट फ़ूड के विविध व्यंजन जेब के लिए भी हलके होने की वजहसे समाज के हरेक वर्गमे ज़्यादा स्वीकृति पाने लगे है। हरेक डीश एक बार चखने के बाद बार बार खाने की इच्छा को रोक पाना मुश्किल होता है।

किन्तु जकया आप जानते हे की अनजाने में आप अपनों प्यारे बच्चे और आप केलिए मौत खरीद रहे है? ** सावधान रहिये आप खरीदने से पहले! **

बटर या फिर कहनेके लिए बटर में से बनाये गए या शुद्ध तेल में तले होने का दावा किया जा रहा हो ऐसे स्वादिष्ट व्यंजन हानिकारक मात्रामे ट्रांस फेट से लह्ज़ हो सकते है।

ट्रांस फेट क्या है?

फेटी एसिड चर्बी के शुक्ष्म तत्व होते हे। फेटी एसिड में हाइड्रोजन का अणु दाखिल कर देने से ट्रांस फेट बनती है। इसे हाइड्रोजिनेटेड वेजिटेबल ऑइल कहा जाता है। यह प्रक्रिया फेक्टरीकी लेबोटरीमे की जाती है। सरल भाषा में कहे तो वनस्पति तेल जैसा की सोया आयल में केमिकल प्रोसेस करने की वजह से विशेष चर्बी का निर्माण होता है जिसे ट्रांस फेट कहा जाता है।

हम सब जानते हे की खाद्य तेल रूम के तापमान पर प्रवाही रूपमे होता है। यह रूप लम्बे अरसे तक स्थायी नहीं रह सकता। ऑक्सीडेशन होने की वजह से उसकी गंध बिगड़ जाती हे और तेल अखाद्य बन जाता है। हाइड्रोजिनेशन करने से तेल घन स्वरूप धारण कर लेता है और लम्बे अरसे तक न बिगड़ने की वजह से संग्रह किया जा सकता हे। हाइड्रोजिनेटेड वेजिटेबल ऑइल में बनाये गए व्यंजन जल्द बिगड़ते नहीं और इन्हे स्टोर करना आसान है जब की शुद्ध तेल या घी में से बने व्यंजन समय के साथ बिगड़ने लगते है।

कौन कौन सी चीजों मे ट्रांस फेट रहती है?

  • मार्जरीन
  • तला हुआ खाना: फ्रेंच फ्राइज, समोसे, भजिया, भटूरा , पूरी, पकोड़े
  • हर तरह के नमकिन
  • बेकरी आइटम्स: कूकी, बिस्किट, केक
  • डोनट, माक्रोवेव पॉपकॉर्न, पोटेटो चिप्स और पैकेट में बिक रहे नास्ते।

आपके मनपसंद मस्का बन में लगाया जाने वाला मस्का यदि आपने किसी बिना प्रमाण के आउटलेट से ख़रीदा हे तो हो सकता हे की आपने बहोत ज़्यादा मात्रामे ट्रांस फेट वाला मस्का बन ख़रीदा है। उसमे रहे हाइड्रोजिनेटेड वेजिटेबल ऑइल के ऊपर रासायनिक प्रक्रिया करके हूबहू बटर जैसा बनाया जाता है। परन्तु ये बटर नहीं है।

तेल को भी बार बार उबलने पर थोड़ी मात्रा में ट्रांस फेट बनती है। समस्या यह है की बाजार में आपको तेल जैसी दिखने वाली चीज़ ही ट्रांस फेट हो सकती है।

ट्रांस फेट क्यूँ हानिकारक है?

ट्रांस फेट किसी कातिल ज़हर की तरह आपको तुरंत हानि नहीं पहुचाता किन्तु कई सालो तक किया गया सेवन एक मंद ज़हर की तरह काम करता है। ट्रांस फेट आपके ख़राब कोलेस्ट्रॉल (एल डी एल) को बढ़ावा देता है जिस वजह से ख़राब और फायदाकारक कोलेस्ट्रॉल (एच डी एल) का संतुलन बिगड़ जाता है जो आपके हृदय की नालिओं में कोलेस्ट्रॉल जमा करके उसे ब्लॉक कर देता है।

१९५० के दसकसे ट्रांस फेट के जोखिम सामने आने शुरू हुए थे। ई.स. १९५७ में कुमेरो और उनके साथिओने २४ मृतकों के पोस्ट मॉर्टम की जांच से यह पता लगाया की उन सभी के हृदयमे महाधमनि की दीवारों में और हृदय की नलिओं में बने हुए प्लेक में ट्रांस फेट बहोत अधिक मात्रा में थी। तकरीबन ८५००० स्त्रीओ के १६ सालो तक किये गए सर्वेक्षण से पता चला की जिन स्त्रिओने हाइड्रोजिनेटेड वेजिटेबल ऑइल का ज़्यादा मात्रामे सेवन किया था उनमे डायबिटीस होने का जोख़िम बहोत ज़्यादा था। अन्य एक ७८,७७८ लोगो पर २० साल तक किये गए सर्वेक्षण में पाया गया की ट्रांस फेट का सेवन हृदय के जोखिम का महत्व पूर्ण कारण है।

ट्रांस फेट इन्स्युलिन की कार्यदक्षता में अवरोध खड़ा करती है जो की डायबिटीज़ का मूल कारण है। डायबिटीस की बीमरी और ट्रांस फेट युक्त जंक फ़ूड का सेवन हृदय रोग एवं कार्डीओवैस्कुलर समस्याओ की वजह से हो रही विविध बीमारियां एवं छोटी उम्रमे होने वाली मृत्यु के महत्व पूर्ण कारण है।

ट्रांस फेट इन्फ्लेमेशन (सूजन लाने वाली जटिल प्रक्रिया) को बढ़ावा देती है।

स्टराइल इन्फ्लेमेशन मतलब किसीभी जंतु के संक्रमण के बिना होने वाली प्रक्रिया। ट्रांस फेट इस प्रक्रिया को लम्बे अरसे तक बढ़ावा दे कर हृदय की नालिओं को ब्लॉक करने की प्रक्रिया को तेज गति से बढाती है। स्वस्थ लोगो पर हुए प्रयोग में प्रतिपादित हुआ है की हर रोज़ ८ प्रतिशत शक्ति फैक्ट्री में उत्पादित कृत्रिम ट्रांस फेट से सिर्फ ५ हफ्ते के लिए दी जाये तो सी. आर. पी. जो की इन्फ्लेमेशन का माप है उसका प्रमाण ३४०% बढ़ जाता है। जरा सोचिये आप इस ज़हरीली ट्रांस फेट का सेवन कई सालो तक करते रहेंगे तो आपके महत्वपूर्ण अंगो का क्या हाल होगा?

कृत्रिम ट्रांस फेट आपके लिवर ऊपर भी विपरीत असर डाल कर उसकी कार्यदक्षता को नुकशान पहुँचती है और कोलेस्ट्रॉल के चयापचय को असुंतलित कर देती है। अंततः हानिकारक कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण बढनेकी वजह से हृदय रोग- दिलका दौरा और अन्य गंभीर कार्डिओवैस्क्युलर बिमारिओ का जन्म होता है।

क्या यह कोई आश्चर्य कीबात है की आजकी युवा पीढ़ी ट्रांस फेट से लह्ज़ व्यंजनों के जानलेवा जाल में फंस कर हृदय रोग, डायबिटीज़, मेदस्विता एवं हाई बीपी जैसी बिमारिओ का शिकार बनके युवा वय में खुद चल कर मोत के मुँह में आ जाती है?!! साथ मे व्यसाय का मानसिक दबाव एवं तम्बाकू और शराब की लत आग में घी डालने का काम करते है।

अब की बार जब भी आप बाजार से आपकी मनपसंद चीज़े ख़रीदे तब ध्यान रखे की उस व्यंजन में ट्रांस फेट 0% लिखा हो। पर एक बात पर गौर करिए की ट्रांस फेट का प्रमाण 0.५ % से काम हो तो पैकेट पर 0% लिख सकते है। किन्तु इस तरह की कई चीज़े बार बार ज़्यादा मात्रा में खाई जाए तो कुल मात्रा बढ़ कर हानिकारक लेवल बना सकती है।





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Dr. Harshal Thaker
Critical Care Specialist